पर्यावरण मंत्रालय में हिंदी को बढ़ावा, समिति की पहली बैठक
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पर्यावरण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक में सरल हिंदी को प्रशासन और जनसंपर्क की मुख्य भाषा बनाने पर जोर दिया गया।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अधिकारियों से हिंदी में हस्ताक्षर और टिप्पणियां लिखने की आदत विकसित करने का आह्वान किया।
New Delhi/ पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने हिंदी भाषा के प्रभावी प्रचार-प्रसार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए पुनर्गठित हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक का आयोजन किया। यह बैठक 20 जनवरी 2026 को तीस्ता सभागार, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने की।
बैठक में संसद के दोनों सदनों के सदस्य श्री मिथलेश कुमार, श्रीमती माया नारोलिया और श्रीमती कमलेश जांगड़े के साथ-साथ हिंदी के प्रतिष्ठित विद्वानों ने सहभागिता की। इसके अतिरिक्त मंत्रालय के सचिव, अपर सचिव, वरिष्ठ अधिकारी तथा मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालयों के प्रमुख भी बैठक में उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मंत्री भूपेंद्र यादव ने हिंदी भाषा को जनसंपर्क का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि मंत्रालय की योजनाएं और नीतियां तभी प्रभावी होंगी जब वे आम जनता तक सरल और सहज भाषा में पहुंचेंगी। उन्होंने विशेष रूप से अधिकारियों और कर्मचारियों से आग्रह किया कि वे जटिल शब्दावली से बचते हुए सरल हिंदी का प्रयोग करें, ताकि मंत्रालय के कार्यों की समझ जनता में बढ़े।
भाषा की सहजता पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि हस्ताक्षर किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व का परिचायक होते हैं और सभी अधिकारियों को अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अधिकारी महीने में कम से कम एक टिप्पणी हिंदी में लिखने की शुरुआत करें, जिससे धीरे-धीरे हिंदी में कार्य करने की आदत विकसित हो सके।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने मंत्रालय और उसके नियंत्रणाधीन कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए। इनमें प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के उपयोग को प्रोत्साहन, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हिंदी सामग्री का विस्तार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन जैसे सुझाव शामिल रहे।
सदस्यों ने यह भी कहा कि पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे तकनीकी विषयों को सरल हिंदी में प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है, ताकि आम नागरिक नीतियों और योजनाओं से सीधे जुड़ सकें। हिंदी को केवल औपचारिक भाषा तक सीमित न रखते हुए इसे कार्य संस्कृति का हिस्सा बनाने पर भी बल दिया गया।
बैठक के समापन पर मंत्रालय के सचिव ने समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति द्वारा दिए गए सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और मंत्रालय के दैनिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
यह बैठक न केवल हिंदी के प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण रही, बल्कि यह भी स्पष्ट संदेश देती है कि केंद्र सरकार मंत्रालयों में हिंदी को सशक्त और प्रभावी कार्यभाषा के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।